शहीद जवान की पत्निने पति का सपना किया पूर्ण, बन गई ARMY ऑफिसर….

नमस्कार दोस्तो आज के इस लेखमें आपका स्वागत है और आज हम आप को एक ऐसी कहानी के बारे में बताने जा रहे हैं जानकर आप भी कहेंगे कि नारी बहोत शक्तिशाली होती है तो बात करे जून 2021 में गलवान में चीनी सैनिकों के दुस्साहस को पानी पिला देने वाले भारतीय सैनिकों में एमपी के रीवा के रहने वाले दीपक सिंह भी शामिल थे जिसकी बात यहाँ पर की गई है और ज्यादातर इसके बारे में बात करे तो यह दीपक सिंह ने वीरता से अपने कर्तव्य का निर्वहन करते हुए 30 भारतीय जवानों की जान बचाई थी ऐसा यहाँ पर बताया गया है और बुरी तरह घायल हो जाने के बाद उनकी जान भी चली गई थी तो दोस्तो इसके बारे आगे जानते हैं.

वैसे ही इसके बारे में जानकारी देते हुए आपको यह भी बता दे कि मृत्यु से पहले दीपक ने अपनी पत्नी से इच्छा जाहिर की थी कि वो सेना में बड़ी अधिकारी बने ओर इसके पीछे वो बहोत ही महेनत भी कर रही थी और पति के शहीद होने के बाद पत्नी ने उनका सपना पूरा करने के लिए जी तोड़ मेहनत शुरू कर दी ओर उसने हिम्मत हारी नही ओर पहले प्रयास में वो कामयाब नहीं हो पाई लेकिन दूसरे प्रयास में वो लेफ्टिनेंट बनने में कामयाब हो गईं ओर उसे सफलता मिली.

दोस्तो बात करे इसके बारे में आगे तो आपको बता दे कि मध्य प्रदेश के रीवा जिले के फरेदा गांव के रहने वाले वीर चक्र से सम्मानित शहीद दीपक सिंह की पत्नी रेखा सिंह ने अपने पति का सपना पूरा करते हुए सेना में लेफ्टिनेंट बनने का गौरव हासिल किया है ऐसा भी यहाँ पर बताया गया है तो दोस्तो यह भी आपको जानकर थोड़ा अजीब लगा होंगा लेकिन आप को भी इधर से सिख मिलती है कि हिम्मत कभी हारनी नही चाहिए 28 मई से चेन्नई में उनका प्रशिक्षण शुरू होगा ऐसा बताया गया है.

तो बात करे आगे तो उन्होंने कहा कि वह अपने पति का सपना पूरा करने और बहनों को सही राह दिखाने सेना में आई है यह बताया गया है और दोस्तो रेखा को प्रथम प्रयास में सफलता नहीं मिली थी उसने भी बहोत ही महेनत की थी और बात करे तो वह हताश नहीं हुई और दूसरे प्रयास में उनका चयन भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट के पद पर हो गया ऐसा भी यहाँ पर बताया गया है और बाद में चेन्नई में प्रशिक्षण लेने के बाद वह सेना में अपनी सेवाएं देंगी यह भी बताया गया है.

शहीद की पत्नी पहले टीचर थी

तो इस शहीद की पत्नि की बात करे तो वह पहले टीचर थी ओर शादी से पहले रेखा सिंह जवाहर नवोदय विद्यालय सिरमौर में शिक्षिका के रूप में कार्य कर रही थीं ऐसा भी यहाँ पर बताया गया है और दोस्तो बात करे तो वह उच्च शिक्षित रेखा के मन में शिक्षक बनकर समाज की सेवा करने के सपने थे ऐसा भी कहा जा रहा है और जब शादी के बाद उनके पति ने दीपक सिंह ने उन्हें सेना में अधिकारी बनने के लिए प्रेरित किया ओर उन्होंने मां भी लिया था.

बाद में इसके बारे में कहा गया है कि रेखा ने अपने पति के शहीद होने के बाद उनके सपने को पूरा करने का संकल्प लिया था और उसने वह सपना पूरा भी कर दिखाया है और बात करे तो इसमें उनके ससुरालवालों ने भी उनका सहयोग किया है ऐसा भी यहाँ पर बताया जा रहा है तो दोस्तो यह रेखा सिंह को उनके पति के शहीद होने के बाद मध्य प्रदेश शासन की तरफ से शिक्षाकर्मी वर्ग दो में नियुक्ति भी दी गई है यहा पर ये बताया जा रहा है.

जानिए सपना कैसे पूरा हुआ

दोस्तो आगे बात करे तो इस बीच रेखा सिंह के मन में लगातार सेना में जाने की इच्छा होती रही क्योंकि उन्हें अपने पति का सपना पूरा करना था इसी लिए उन्होंने महेनत करने में थोड़ी सी भी देर की नही ओर महेनत करती ही रही और इसके लिए उन्होंने जिला सैनिक कल्याण संघ के ऑफिस में जाकर चर्चा की थीं ऐसा भी बताया जा रहा है.

नारी शक्ति को जो पहचान शकते है वही पहचान शकते है और बात करे तो जिसके बाद उन्हें जिला प्रशासन और सैनिक कल्याण संघ से उचित मार्गदर्शन और सहयोग मिला था ऐसा भी बताया जा रहा है और दोस्तो उसके बारे में बात करे तो उन्होंने अपनी तैयारी शुरू की और नोएडा में जाकर सेना में भर्ती होने के लिए प्रवेश परीक्षा का प्रशिक्षण लिया है ऐसा यहाँ पर बताया जा रहा है और वैसे ही पहली बार में ही उन्हें सफलता नहीं मिली लेकिन दूसरे प्रयास में वह सफलता हासिल करते हुए लेफ्टिनेंट बन गई थी ऐसा बताया गया है.

वैसे ही बता दे कि गलवान में कब सैनिकों को सबक सिखाया गया था और वैसे ही आपको बता दें कि शहीद दीपक सिंह का जन्म 15 जुलाई 1989 को रीवा के फरेदा गांव में हुआ था ओर वह बहोत ही बहादुर भी थे बाद में यह दीपक 2012 में भारतीय सेना के बिहार रेजिमेंट में बतौर नर्सिंग असिस्टेंट चिकित्सा कोर में भर्ती हुए थे ओर यही से आगे बढ़े थे.

उन्होंने भी इस समयमे बहोत महेनत की थी और शहीद दीपक सिंह 15 जून 2020 में लद्दाख की गलवान घाटी में अचानक हुए चीनी हमलों का मुकाबला करते हुए वीरगति को प्राप्त हो गए थे यह भी बताया जा रहा है और वो शहीद हो गये थे और यह शहीद नायक दीपक सिंह नर्सिंग सहायक की ड्यूटी कर रहे थे ओर अभी ही यह हिंसक झड़प के दौरान उन्हें भी काफी चोटें आई थीं यह भी बताए जा रहा है और उसके बाद भी उन्होंने 30 सैनिकों की जान बचाई थी ओर फिर शहीद हुई थी.

अंत मे इसके बारे में बात करे तो गलवान में हिंसक झड़प के दौरान वह घायल होकर भी साहस का परिचय देते रहे थे और उनकी चर्चा भी बहोत ही हो रही है और तो बता दे कि हालांकि बाद में गहरे जख्मों के कारण वह शहीद हो गए थे ऐसा भी बताया जा रहा है और वैसे भी शहीद दीपक सिंह के देश के दिए इस बलिदान के लिए मरणोपरांत वीर चक्र से सम्मानित भी किया गया था ओर उनकी पत्नी को भी बहोत सम्मानित किया जा रहा है.

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